जो विदेशियों ने नहीं किया बो भारत ने कर दिया, भारत की संसद भवन की खूबसूरत इमारत का उद्घाटन,28 मई को होगा ,नई खबर

                                                                                  भारत

      देश का नया संसद भवन



............................जी हा सही पढ़ रहे हैं विद्वेषोंकीआप क्योकी विद्वेषों की संसद बोले तो संसद भवन 200 से 300 साल पुरानी हैभारत की संसद ने 100 साल पुरानी है

  नए भारत की  संसद भवन की खूबसूरत इमारत का उद्घाटन,28 मई को होगा

 पता ही है कि तब भारत पर ब्रिटिश हुकूमत का कब्जा था। इसलिए राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री तो थे नहीं। वायसराय के जरिए ब्रिटेन की सरकार हम पर हुकूमत किया करती थी। 1926 से 1931 तक लॉर्ड इरविन भारत के वायसराय थे। इस कारण भारत में संसद भवन के उद्घाटन का सौभाग्य उन्हें ही हाथ लगा। 18 जनवरी, 1927 को लॉर्ड इरविन ने मौजूदा संसद भवन का उद्घाटन किया था। तब उसे 'हाउस ऑफ पार्ल्यामेंट' कहा गया। इस हाउस ऑफ पार्ल्यामेंट में ब्रिटिश सरकार की विधान परिषद काम करती थी।

अब बात नए संसद भवन की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 दिसंबर, 2020 को नए संसद भवन की आधारशिला रखी। शिलान्यास समारोह में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, कैबिनेट मंत्रियों और विभिन्न देशों के राजदूतों ने भाग लिया। नई संसद का बिल्डिंग लगभग 65,000 स्क्वैयर मीटर में बनी है। नया संसद भवन की डिजाइनिंग गुजरात स्थित एक आर्किटेक्चर फर्म एचसीपी डिजाइंस ने तैयार की है जबकि निर्माण टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड ने किया है। एचसीपी डिजाइन के पास गुजरात के गांधीनगर में सेंट्रल विस्टा और राज्य सचिवालय, अहमदाबाद में साबरमती रिवरफ्रंट डिवेलपमेंट, मुंबई पोर्ट कॉम्प्लेक्स, वाराणसी में मंदिर कॉम्प्लेक्स के रीडिवेलपमेंट, आईआईएम अहमदाबाद के नए कैंपस के डिवेलपमेंट जैसे कामों का पहले से अनुभव है। कहा जा रहा है कि इस पर लगभग 1,200 करोड़ रुपये की लागत आई है।
भविष्य की जरूरतों का ध्यान
पुराने संसद भवन में लोकसभा के लिए 543 सीटें जबकि राज्यसभा के लिए 250 सीटें हैं जबकि नए भवन में लोकसभा और राज्यसभा की क्रमशः 888 और 384 सीटें हैं। संसद के संयुक्त सत्र के लिए पुराने भवन के केंद्रीय कक्ष का इस्तेमाल हुआ करता है, लेकिन नए भवन में संयुक्त सत्र का आयोजन लोकसभा हॉल में होगा जिसमें 1,272 सांसदों के बैठने की व्यवस्था है। नया संसद भवन चार मंजिला है जबकि पुराने संसद भवन में तीन मंजिल है।


पुरानी बिल्डिंग में बारिश में बहुत शेयर कमरो में बारिश का पानी अंदर गिरा था नई बिल्डिंग की जरूरत में एक मुद्दा इस बात का ही था कि संसदों को बैठने की कमी भी हो रही थी,2024 में संशादो की सांख्य भी बढ़ होने बाली तो उन सब के लिए पूरी ब्यस्त है

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